Wednesday, December 31, 2014

नव वर्ष की शुभ -कामनाएं!

आप तक पहुँचे नव वर्ष , की शुभ -कामनाएं!
सुख समॄद्धि सर्वत्र मह्के ,है यही मम भावनायें!!
स्मॄति विगत वर्ष, मानस पटल पर अंकित रहें,
पर पुनरावॄत्ति ना कर सके, विगत  दु्र्घट्नायें!!
किसी ने कुछ नया पाया,तो किसी ने खोया था,
जीवन-क्रम य़ूँ ही चले, हैं यह कैसी विवष्तायें?
समय सारथी होता है ,केवल निज पुरुषार्थ का,
फ़िर क्यूँ नही समझते,हम दूसरों की भावनायें?
संकल्प लें आज दूसरों के सुख और सम्मान का,
फ़िर जगायें विश्व बन्धुत्व की पुरातन धारणायें!!
आप तक पहुँचे नव वर्ष , की शुभ -कामनाएं!
सुख समॄद्धि सर्वत्र मह्के ,है यही मम भावनायें!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Wednesday, December 17, 2014

क्यूँ नरसंघार ?

धर्म की आड मे है,ये कैसा व्यवहार ?
भाई-भाई का करता, क्यूँ नरसंघार ?

मज़हब नही सिखाता,आपस मे बैर,
सदी २१वीं खुदाया करना इनकी खैर!!

आतंकवाद मे बच्चों का था क्या काम?
क्या यही सिखाता है,मज़हब- इस्लाम!!

खुदा खुदा करते खुद बन गये खुदा !
पूछो उनसे- जिनके बच्चे हुये ज़ुदा !!

फ़ेस बुक?

चेहरों की कैसी ज़मात है
फ़ेस बुक?
अपनी-अपनी भडास है फ़ेस बुक!
कही सुन्दर साहित्यिक रचनायें है,
कही गन्दगी की संडास है फ़ेस बुक!!
बेहूदगी है या रोमाँस है फ़ेस बुक ?
शिछा औ ग्यान का डाँस फ़ेस बुक !
कुछ नया रचने की तमन्नाओ से,
ग्रसित युवकों का चाँस है फ़ेस बुक!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Thursday, October 30, 2014

आज जयन्ती है  ,उस लौहपुरुष की ,
जिसने भारत को एक सूत्र मे पिरोया !!
आज पुण्य तिथि है उस महिला की,
जिसके प्रयाण पर सारा भारत रोया !!
भारतीय इतिहास की एतिहासिक तिथि,
जब हमने एक कुशल प्रशासक पाया,
आज ही एक कुशल प्रशासक खोया !!
है नियति का नियम सबको मान्य,
उसने वही पाया है जो जिसने बोया !!
देश हित के लिये दोनो का समर्पण,
कैसे हो विस्मॄत,चिरनिद्रा मे सोया !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Thursday, October 23, 2014

दीपोत्सव

पंच महोत्सव की हा्र्दिक शुभ कामनायें !
धन्वन्तरि जयन्ती की स्वस्थ धारणायें !!
धन-कुबेर से समॄद्ध हो इस पावन-पर्व से,
खुशियाँ सर्वत्र महके,है यही मम भावनायें !!
धरा से गगन तक खुशी ही  लहलहाये,
गरीबी से न आहत हो कोई सम्वेदनायें !!
चतुर्दशी को "भारत स्वच्छ’विस्मॄत न हो,
तभी बरसेंगी धनलछ्मी की समभावनाये!!
दीपोत्सव करे ज्योतिर्मय भारतवर्ष को,
साकार हो उठें "राम-राज्य"की कल्पनायें !!
कॄष्ण सी प्रखर हो गोवर्धन की  आस्था,
तभी सम्भव है ग्राम्य जीवन सफ़लतायें !!
दौज़ के पावन पर्व मे छिपी है सम्मान,
और नारी की अस्मिता की नई दिशायें!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुज सिकन्दरा आगरा २८२००७

अयोध्या का धोबी

न दशहरे के रावण से किसी ने सीख ली
न राम के आदर्श को कोई सीख पाया !!
दुर्भाग्य हम राम के देश मे पैदा हो गये,
इसीलिये गाँधी भी कभी नही चीख पाया!!
हाँ धीरे से बोले "हे राम!" शान्त हो गये,
जयन्ती होती है,आचरण नही दीख पाया!!
जो कभी कोई अनुसरण करता भी है तो,
अवसरवादी पीछे ढकेल कर सत्ता पा गये,
नेहरू हो या केज़रीवाल वही दीख पाया !!
य़ूँ राम राज्य की परिकल्पना व्यर्थ होगी,
क्योकि अयोध्या का धोबी नही चीख पाया !
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Friday, October 3, 2014

विजया दश्मी की शुभ कामनायें !

आप तक पहुँचे विजया दश्मी की शुभ कामनायें !
कर दो पराजित ,अन्तः करण की   दुर्भावनाये !!
जागॄत करो मर्यादा पुर्षोत्तम राम सा आत्म संयम,
भेद दो अहं, स्वार्थ और वासना की सम्भावनायें !!
जीत लो प्रेम और विशवास से विश्व की  धारायें,
धरा पर अवतीर्ण हो्गी,राम-राज्य की कल्पनायें !!
स्वजन और परिजन से परे, विश्व-बन्धुत्व होगा,
गूँजेगी तभी हिन्दुत्व के प्रथम प्रष्ठ की रचनायें !!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Wednesday, October 1, 2014

गाँधी और लाल बहादुर को शत शत नमन

गाँधी और लाल बहादुर को शत शत नमन,
है अर्पित उन्के चरणो मे श्रद्धा रूपी सुमन !!
कर्ज़ तुम्हारा कैसे उतारेंगे, हम हिदुस्तानी ?
भ्रटाचार युक्त हो गई यह,धरा और  पवन !!
कोई तुमसा संत संक्ल्प स्वछता का लेगा,
यह धरा ही नही,समाज भी होगा उपवन !!
चलो आज शपथ उठायें ये,हम भारतवासी !
घर-आँगन की तरह सजाये अपना वतन !!
सड्कों पर अब नही, एक तिनका फ़ेंकेगे ,
गर करे कोई तो,उसका होगा निष्का्सन !!
धर्म आस्था के पावन पर्व अब वही होंगे,
जहाँ स्वच्छ होगी नदियाँ और पर्यावरण !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा आगरा २८२००

Tuesday, September 30, 2014

मशविरा

कभी किसी और से उसकी बातें न कर,
वो भी कही उसका दीवाना ना हो जाये!
है इश्क वो हसरत ,जिसको छुपाने से,
मिठास ऐसी, दिनो-दिन बढती ही जाये !!
गर कर दिया एलान,उसका सारे जहाँ,
खुद तो मरोगे और वो रुसवा हो जाये !!

है इश्क वो आतिश गालिब जो जलाये,
वो जले ही,औरो का बेडा गर्क हो जाये !!
है मशविरा मेरा यह ,इश्क के परिन्दों से,
ज़ल्द अपनाले उसे,कहीं फ़ुर्र न हो जाये !!
बोधिह्सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Thursday, September 4, 2014

शिछक दिवस

विद्या-मन्दिर अच्छा खासा बाज़ार हो गया,
प्रमाण-पत्र क्रय-विक्रय का व्यौपार हो गया !
गाँव-गाँव मे पढे-लिखों का अम्बार हो गया,
विद्या-मन्दिर अच्छा खासा बाज़ार हो गया !!

शिछक कितना,      अब लाचार हो गया ?
पुत्र उसी का ,अब गुण्डों का सरदार हो गया,
कछा मे आ जाके , तो आभार   हो गया !
विद्या-मन्दिर अच्छा खासा बाज़ार हो गया !!

विषय-बोझ से लदा शिष्य, बीमार हो गया,
नित-नूतन पाठ्य-क्रम,कुतुब मीनार हो गया !
शिछा-नीति बदलना,  एक त्यौहार हो गया,
विद्या-मन्दिर अच्छा खासा  बाज़ार हो गया !!

राजनीति से  सरस्वती को प्यार हो गया,
उसके वीणा का सुर, अब नाकार हो गया !
शिछक पिटना, दैनिक समाचार हो गया,
विद्या-मन्दिर अच्छा खासा बाज़ार हो गया  !!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दर आगरा २८२००७

Wednesday, September 3, 2014

संस्कॄति के समन्दर से

संस्कॄति के समन्दर से, सभ्यता का सुर गूंजता है,
समॄद्ध नही है जो, वह इसी के गर्भ मे डूबता है !!
इसके शोर मे भी अलख एक अपने अतीत की है,
जिस पर चिर स्थाई सॄजन फ़िर फ़िर सूझता है !!
नित नई लहरें नये सॄजन की द्स्तक दे रही है,
पुरातन के नित टूटने का भ्रम हर कोई बूझता है!!
सॄष्टि के इस नियम मे बाधक हम क्योंकर बनें,
समॄद्ध है वही संस्कृति जिसमे सृजन ही सूझता है!!
हमारी संस्कॄति के समुद्र-मन्थन की है परिणति,
कि विश्व आज भी हिदू,बौद्ध,जैन धर्म को पूजता है!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Monday, September 1, 2014

हर किसी से कभी दिल की बात नही कहना,

हर किसी से कभी दिल की बात नही कहना,
गर कोई बदनियत हो जाय,ज़ुल्म मत सहना !!हर किसी से कभी दिल 
है मशविरा उन सभी ना समझ बच्चियों को ,
प्यार के झूठे भुलावे मे ,न कभी यों ही बहना !!हर किसी से कभी दिल 
खुद बखुद आप गौर इस बात पर तो कीजिये,
क्यो इस कदर महरबान, दे रहा उपहार-गहना !!हर किसी से कभी दिल 
हर किसी को शक की निगाह से मत देखिये,
पर हर निगाह को भी, मत समझना अपना !!हर किसी से कभी दिल 
ज़ुल्म की हर इबारत, बर्दाश्त से शुरू होती है,
मोहब्बत के फ़रेब को,हमेशा तौबा ही कहना !!हर किसी से कभी दिल 

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Saturday, June 14, 2014

बेटियाँ?

क्यूँ आज भी समाज़ मे घुट-घुट के जी रही हैं बेटियाँ?
पाँवों मे पायल नही, बेडी पहन कर जी रही है बेटियाँ !
धिकार है समाज को जहाँ,बैश्या बन जी रही है बेटियाँ,
हमने कभी उन्हे देवी कहा, दासीबन जी रही हैं बेटियाँ !!
समाज़ के रछक भछक बने फ़िरभी जी रही हैं बेटियाँ,
भाई-बाप ही आनर किलिंग करे,कहाँ जी रही है बेटियाँ?
अभिषाप रुकेगा नही ,क्योंकि होठों को सी रही है बेटियाँ,
घर बाहर बोलने की दो इज़ाज़त,अबलानही रही है बेटिया!!
समाज के जिस अभिषाप का पुरुष उत्तरदायी है हमेशा,
परिवार के सममान को क्यूं गले लगा जी रही है बेटिया!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Wednesday, June 11, 2014

एक नन्ही परी

इक दिन एक नन्ही परी, जब मेरे आँगन मे आई!
सारे घर मे खुशियाँ गूंजी, ओर बाज उठी शहनाई!!
किलकारी से महका आँगन,उपवन मे छाई तरुणाई,
फ़िर मीठे तुतले बोलों से,पुरखों की बगिया महकाई!! इक दिन एक नन्ही परी,
पता नही संग सहेली ,कब विद्द्यालय की दौड लगाई,
धीरे-धीरे यौवन की पाँखुर, लेने लगी नई अरुणाई !! इक दिन एक नन्ही परी,
स्वप्न सलोने लगी सजाने,पौढी पर बारात जो आई,
सबकी आँखो मे अश्रुधार थी,घडी विदा की जब आई!! इक दिन एक नन्ही परी,
चार दिना भी बीते नही ,दहेज़ लोलुपों ने कार मंगाई,
कैसे अम्मा-बाबू से कहती,खामोश सह्ती रही पिटाई!! इक दिन एक नन्ही परी,
घर-घर परियो की यही कहानी,मुझको दे रही सुनाई,
किससे मनुहार करे?सारे अब तो मुझको लगें कसाई!! इक दिन एक नन्ही परी,
उस दिन आँखे पथराय गई,तलाक नोटिस दिया सुनाई,
कोर्ट-कचहरी सब बेमानी, लगी गाँठ सुलझे न सुलझाई!! इक दिन एक नन्ही परी,
पर वो भारत की नारी है, उसने फ़िर हार नही अपनाई,
तन-मन-धन से फ़िर शुरू की, उसने आगे अपनी पढाई!! इक दिन एक नन्ही परी,
मन मे इक विश्वास जगा ,अद्ध्यन से नही बडी कमाई,
अद्ध्य्यन अध्यापन से नारी मे, उसने नई अलख जगाई!!इक दिन एक नन्ही परी,
जन -सेवा संकल्प लिया ,सरकारी नौकरी की करी पढाई,
आज सभी उसके गुण गाते, खाते उसी की गाढी कमाई !!इक दिन एक नन्ही परी,
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Recruitment 2014-15 Notification: SBI Clerk Recruitment 2014-2015 Exam Advertisement...

Recruitment 2014-15 Notification: SBI Clerk Recruitment 2014-2015 Exam Advertisement...: SBI Clerk Recruitment 2014 State Bank of India has finally unleashed the notice for the engagement of Assistant in the branches of SB...

Tuesday, June 3, 2014

नमो-नमो

नमो-नमो का जाप कर जनता ने,
भ्रष्टाचार की जडे अभी उखारी है !
उसने पूर्ण बहुमत दे वादा निभाया,
खरा उतरने की बारी तुम्हारी है !!नमो-नमो ....
गाँधी के राम-राज्य की कल्पना,
सब तक पहुँचाने की तैयारी है !!नमो-नमो ....
मज़बूत जनतंत्र स्थापित करना,
पहली ज़िम्मेवारी ,हमारी है  !!नमो-नमो...
’सबका साथ-सबका विश्वास’से,
महके हर उपवन हर क्यारी है!!नमो-नमो...
आशा के अगणित कमल खिले,
कसौटी पर खरा रहने की बारी है!!नमो-नमो...
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Tuesday, May 27, 2014

देखा नही

हम आपके इतने करीब थे,
फ़िर भी कभी आपने हमे देखा नही !!
अब जब दूर इतने हो गये,
फ़िर भी हमारे बीच कोई रेखा नही !!
हर समय उम्र का फ़ासला था,
लेकिन फ़िर भी कभी कोई लेखा नही!!
आपके प्यार मे उम्र आडे थी,
इसीलिये आपने एक नज़र देखा नही !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Sunday, May 18, 2014

जाग गया है हिन्दुस्तान

बदल गया समय, और जाग  गया है हिन्दुस्तान !
अब इन्डिया नही, सब मिल बोलो जैहो हिन्दुस्तान!!
धर्म,जाति बन्धन से ऊपर करना है नव निर्माण !
भाई-चारे का नव इतिहास लिखेगा फ़िर हिन्दुस्तान!!
धर्म-निर्पेछ का ओढ लबादा ठगा सभी ने हमको !
हम नही वोट-बैकं किसी दल के समझा हिन्दुस्तान!!
राष्ट्र निमाण को यदि सब मिल कर काम करेंगे,
फ़िर "सोने की चिडिया’ कहलायेगा यह हिन्दुस्तान!!
वंशवाद की जो बेल कटी है,फ़िर नही पनपने देंगे,
"वसुधैव कुटुम्बकम" पर आधारित होगा हिन्दुस्तान!!
बोधि्सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Friday, May 16, 2014

नमो नमो की वैतरणी आई,

नमो नमो की वैतरणी आई,
घर-घर बाजी खूब बधाई !
पर  भूल ना जाना भाई,
इससे करनी हमे सफ़ाई !!नमो नमो....
कोई धर्म-मज़हब हो भाई,
देश हित है पहली माई !!नमो नमो....
सो ना जाना ओढ रज़ाई,
वरना होगी बडी हँसाई !! नमो नमो....
शासन जब करै कडाई,
धीरज धरौ सब भाई !!  नमो नमो....
संयम-समय की ताईं,
लडनी है बडी लडाई !!  नमो नमो....

बोधिसत्व कस्तूरिया  २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा


फ़िर कीचड से कमल खिला

फ़िर  कीचड से कमल खिला है,
तुष्टीकरण वालों का दिल हिला है!
कैसे फ़ेल हो गया अबकी पासा,
काँग्रेस,सपा सबकी टूट गई आसा!
कैसे वोट-बैंक टूटा यह मन्थन ज़ारी है!!फ़िर  कीचड से कमल खिला है,

जाति-पाँति से  बडा राष्ट टूटते देखे,
सभ्य समाज के नही यह सब लेखे !
धर्म-जाति पर विकास,सुशासन भारी है!!फ़िर  कीचड से कमल खिला है,

अब कैसे हवा-हवाई किले बनेगे ?
कैसे बेटे-बेटी और भतीजे पलेगे ?
सोच सोच छेत्रीय राजनीति फ़िर हारी है!!फ़िर  कीचड से कमल खिला है,

अब कैसे चढ गुण्डों की छाती पर,
"मुहर लगेगी हाथी पर"!
कह दलित की बेटी  कब तक ठगती?
महल-दुमहले बना कहती अबला नारी है!! फ़िर  कीचड से कमल खिला है,

६७ वर्षो तक ठगी गई यह जनता कहती,
"सिंहासन खाली करो" अब उसकी बारी है!!
नई चुनौती और नई अपेछाएं हैं,
"सबका साथ-सबका विश्वास"
केवल यही नीति,अब सब पर भारी है!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Tuesday, April 22, 2014

प्रजातंत्र के पावन पर्व पर ,मतदान करो

अब की बार घर-घर यह अलख् जगानी है,
भ्रष्ट-घोटालों मे लिप्त ,ये सरकार हटानी है !!
वंशवाद और भ्र्ष्टाचार की अब जडें उखाडो,
प्रजातंत्र मे जन-जन की सरकार बनानी है !!अब की बार घर-घर...
जातिवाद-साम्प्रदायिकता से ऊपर उठ्कर,
सर्वधर्म- समभाव की अब सोच जगानी है !!अब की बार घर-घर....
अधिकारों की छोड, कर्तव्यों की भी सोचो,
प्रजातंत्र पर फ़िर इस बार मुहर लगानी है !!अब की बार घर-घर...
प्रजातंत्र के पावन पर्व पर ,मतदान करो,
सुदॄढ,सुयोग्य-सुसंगठित,सरकार बनानी है !!अब की बार घर-घर...

बोधिसत्व कस्तूरिया एड्वोकेट २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Friday, March 28, 2014

तन्हाई

सागर मे गहराई होती है!
यादों मे तन्हाई  होती है!!
जब तक फ़टे ना होय बिवाई,
तब तक पीर पराई होती है!!

साथ दोगे अगर,तो मुकुरायंगे ज़रूर!
प्यार दिल से करो,निभायेंगे ज़रूर!!
राह मे काँटे हों ,चाहे कितने भी ,
आवाज़ गर दोगे,तो आयेंगे ज़रूर !!

दिल की गहराईमे रखते है आपको,
पल्कों पे ,बिठाये रखते है आपको,
दिल धडकता हो तो सुनिये गौर से-
हर धडकन के साथ याद करते है आपको!!

Friday, March 7, 2014

वूमन्स डे २०१४



है समय उठो अबला से सबला बन जाओ !
परिवार-प्रेम त्याग,राश्ट्र-प्रेम से जुड जाओ!!
सभ्य-सुसंक्रत समाज की तुम ही धाती हो ,
हर संकट से लडने को तुम आगे आती हो!!
धीरज,धर्म और समर्पण तेरे ही आभूषण हैं,
जो"भोग्या’ समझे तुझे, वो स्वयं प्रदूषण हैं!!
धिक्कार!वो पुरुष ,जो तुझसे व्यभिचार करे,
प्रणाम उसे जो तेरा सम्मान व सतकार करे!!
मन से मॄदुल रहकर भी,माँ-दुर्गा बन जाओ !
कलुष-नियत धारी पर ,ले खडग तन जाओ!!है समय उठो अबला से सबला बन जाओ !
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Thursday, February 13, 2014

चन्द आशार वैलेन्टाइन के लिये


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साथ दोगे अगर, तो मुस्कुरायेंगे ज़रूर,
प्यार दिल से करोगे,तो निभायंगे ज़रूर!
राह मे काँटे हों, चाहे कितने भी सनम,
आवाज़ दोगे दिल से, तो आयेंगे ज़रूर!!

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इश्क मे कभी ,मौत से डरता कौन है?
प्यार हो जाता है, उसे करता कौन है?
सारा जहाँ कुर्बान,बस आपकी खातिर,
फ़िर भी कहते है फ़िक्र करता कौन है?

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दिल की गहराई मे रखते हैं सनम आपको,
हर पल पल्कों पर बिठा्ये रखते है आपको!
दिल धडकता हो तो, सुनिये यह गौर से-
"हर धडकन के साथ, याद करते हैं आपको!!"
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Friday, January 10, 2014

कभी किसी

कभी किसी से दिल के रिशते जोडना नही,
गर जुड जायें तो ,फ़िर कभी तोडना नही !
जुडने से नही ,तोडने पर तकलीफ़ होती है,
इसीलिये वफ़ा का चिलमन  ओढना नही !!कभी किसी से .....
ज़िन्दगी मे प्यार का अहसास भी ज़रूरी है,
कच्चा घडा है ये, इसे फ़िर फ़ोडना नही !!कभी किसी से .....
इस ज़ज़्बे  मे हर कोई, हारा ही हारा है,
हारके जीतने का सिलसिला तोडना नही !!कभी किसी से ....
ज़िन्दगी के चमन मे फ़ूल लाखो खिलेंगे,
फ़ूल जो चुनो, उससे मुँह  मोडना नही !!कभी किसी से ....

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७