Friday, May 13, 2016

विश्वास


गर मुझे उसके ज़ज़्बात का अहसास होता, वो मेरे नज़दीक होती,मै उसके पास होता!! ख्वाबों की तामीर को न इस कदर बनाते, न गिरने की आहट होती,न विश्वास होता!! काश मेरे ज़ज़्बात,मेरे आईने से परखे होते, न उसे कोई शक,न मै यूँ बदहवास होता!! पर अब अफ़सोस करने से भी क्या फ़ायदा? न मिलते,न गिले-शिकवों का अहसास होता!! सुन अपनो से ही गिले शिक्वे हुआ करते है, गर मानते गैर ,तो तू क्यूँ अपना खास होता!! बोधिसत्व कस्तूरिया२०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा,आगरा-२८२००७

Thursday, April 14, 2016

श्रद्धांजलि


अब हर श्व्वास,इतनी बदहवास हो गई! राष्ट्र-भक्ति,देश-द्रोहियो की दास हो गई!! "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता"माँ-भारती का, गले का हार न हुई,वरन फ़ाँस हो गई!! संविधान के निर्माता शर्मिन्दा हो गये, १२५वी जयती पर,आत्मा उदास हो गई!! डा० अम्बेडकर! दूँ तुम्हे क्या श्रद्धांजलि? संविधान की शुचिता अट्टहास हो गई!! बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा,आगरा-२८२००७

Friday, April 8, 2016

नव संम्वत्सर २०७३,नूतन जागृति का उदघोष!

नव संम्वत्सर २०७३,नूतन जागृति का उदघोष! चारो दिशायें भर रही,,मानव मे स्फ़ूर्ती औरजोश!! खेत-खलिहानप्रतिपदा,ज्यों कर रही हो यूँ सन्धि! धन्य हर मानव मे है, सुवासित सरसों की सुगन्धि, हरधर्म और जाति"भारत माता की जै"मे मदहोष!!नव संम्वत्सर..... किस धर्म-ग्रन्थ मे लिखा है,मादरे वतन से बेवफ़ाई, किन धर्म गुरूओं और उलेमाओं ने,आग है ये लगाई? जिस माटी मे पले-बढे,जहाँ मिले राम-रहीम से भाई, मुस्सलसल ईमान न रखे वो नही मुसल्मान जोश!!नव संम्वत्सर ...

Friday, March 11, 2016

शपथ

तुष्टीकरण और धर्मनिरपेछता की आड मे अब,
राष्ट्र्वाद,और संप्रभुता से खिलवाड न होने पाये!
बन्द करो आज़ादी की बरबादी करने वालों को,
देश-द्रोह-नासूर कही तिल का ताड न होने पाये!!
"साम्यवाद,-समाजवाद""राश्ट्र्वाद"पर क्यों हावी?
गुबार रेत का एकत्र हो,कहीं पहाड न होने पाये!!
भारत माँ के सपूतो की कुर्बानी क्या समझे कोई?
कल तक जो चूहे बिल के थे,साँड न होने पाये!!
"आपातकाल"के अनुयायी, देते दुहाई अभिव्यक्ति
है शपथ तुम्हे!भारत माँ की दहाड न खोने पाये!!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा-२८२००७

Tuesday, March 8, 2016

अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस!

महिला दिवस
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है आज फ़िर अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस!
बधाई उन सभी को ,जिन्को संग्यान है!
सोचा कभी उनका भी जो पीट्ती है लोहा,
बाँध पेट से नव सृजित  नन्ही जान है!!
कब तक दारू की भाँति रोज़ पी जायेगी,
जिसको देवी होने का मिला सम्मान है!!
उसको कब तलक नारी शक्ति बतलाकर,
लूटते रहेगे और फ़िर भी बने अग्यान है!!
कहते है"आधी आबादी पीडित-शोषित है!"
साँझ से पहले,शोषण करके अभिमान है!!
शिछित होगी जब,अधिकारो का हो ग्यान,
निश्चित मिलेगा, छीना गया जो सम्मान है!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज,सिकन्दरा,आगरा-२८२००७

Saturday, March 5, 2016

शिव रात्रि महापर्व

शिव की शक्ति,शिव की महिमा अपरम्पार,
जिस पर कृपा दृष्टि करें, उसका बेडा पार!!
जन हित मे पी जावें,हँस कर विष-प्याला,
नंदी की करें सवारी,पहिरें बाघम्बर छाला!!
सर्प करें नर्तन गले,चन्द्र सुशोभित मस्तक,
हाथ त्रिशूल और डमरू,आज दे रहे दस्तक!!
शिव रात्रि के् महापर्व,गौरा संग व्याह करे,
भंग के रंग मे चकाचक बाराती स्वांग धरे!!
घर-आँगन,गली-मुहल्ले शि्व की जै-जैकार,
एक पुकार पर करते, सब भक्तों का उद्धार!!
अहं-स्वार्थ पर मरने वालो,तुमको-धिक्कार,
शिव भक्त बनो तो, परमार्थ बनाओ आधार!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा-२८२००७

Friday, March 4, 2016

मधुर-मिलन

तुम सबसे सुन्दर हो
उससे सुन्दर बतियाँ !
पास नही हूँ अब तेरे,
आस निहारे अखियाँ !!
मन-मन्दिर मे झाँकूं,
कैसे मिलेंगी सखियाँ ?
हर जतन अकारथ है,
बीत रही अब रतियाँ !!
रात चाँदनी लिखती है,
प्यार भरी वो बतियाँ !!
अपने अंक भरूँ तुझको,
जाग न जायें सखियाँ !!
हर आहट है अहसास,
मधुर-मिलन-बतियाँ !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा आगरा २८२००७

Sunday, February 21, 2016

आवाज़ दो!

मैने तुम्हे स्वर दिया,  तुम इसे आवाज़ दो!
छेडा जो राग मैने, तुम इसे इक साज़  दो!!
पथ-प्रदर्शक हम बने,तो तुम बनो अनुयायी,
विश्व हो अचम्भित, और सभी को नाज़ हो!!
है समृद्ध संस्कृति हमारी,संग्रहीत तुम करो,
गिरने न पाए इस पर,गर कोई  गाज़ हो!!
विरोध के स्वर क्यों इतने गम्भीर हो गये?
अपने अपनो पर झपटें,ज्यों कोई बाज़ हो!!
सरकारी-समपत्ति किसने की हवाले आग के?
देश-द्रोह से लिप्त,छिपा इसमे कोई राज़ हो!!
अपने-परायों को चिन्हित करने का वक्त है,
है अपेछा आपसे,समझ दारी अब आज हो!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२  नीरव निकुन्ज  सिक्न्दरा आगरा२८२००७