Thursday, January 29, 2009

बसंत


आओ आओ ऋतु-राज बसंत !
तुम्हारा स्वागत करती हैं समस्याएं अनंत !आओ-आओऋतुराज बसंत
नए वर्ष में क्या कर सकोगे इनका अंत ?
आओ-आओ ऋतुराज बसंत !!
हम नही भुला सकते हैं , २६/११ का दर्द,
क्या आतंकवाद का तुम ,कर सकोगे अंत ?आओ-आओ.......
बेकारी और बेरोजगारी की सुरसा का ,
शीघ्रातीशीघ्र करदो इन सभी का अंत।!
आओ-आओ ऋतुराज बसंत !!
हिंसा पर अहिंसा को विजय मिल जाए ,
इस धरा पर अवतीर्ण हो गाँधी सा संत !
आओ-आओऋतुराज बसंत ,तुम्हारा स्वागत करती हैं समस्यायें अनंत !
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुज सिकंदरा आगरा

Sunday, January 18, 2009

मानव


मानव तू क्यों ,इतना निष्ठुर और नाराज़ हो गया?
क्या यह विश्व-युद्ध का फ़िर से आगाज़ हो गया ?
पहले युद्ध शुरू होने से पहले,दुन्ध्भी बजा करती थी !
पर अब तो क्रूर आतंकियों का ,मन-भावन साज़ हो गया !!मानव तू क्यों ........
कहाँ गई गीता ,गाँधी, और ईसा की वाणी ?
मानव तो पशु हो गया,येही हमारा समाज हो गया !!मानव तू क्यों .........
इन अंधे - बहरों की ज़मात को, कौन पढाये ज्ञान ?
इसी लिए शालीन पुरूष भी अब,अपनी आवाज़ खो गया !!मानव तू क्यों .......
फिर अवतीर्ण हो जाओ प्रभू,चाहे इक और कुरुक्षेत्र हो जाए !
उसके बाद कहें सभी, शान्ति-समृधि का राम-राज हो गया !!मानव तू क्यों ......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा-२८२००७

Friday, January 16, 2009

satya

हमने जिंदगी को ,इतने करीब से देखा है !

जीवन-मृत्यु मध्य ,एक हल्की रेखा है !!

पता नही इह लोक-परलोक की दूरी ,कब मिट जाय?

विश्वास-अविश्वास की मजबूरी कैसे घट जाय ? हमने जिंदगी .......

रिश्तों दुशाला ओढ ,छिपे हैं कितने ही हत्यारे ?

उन्हें क्या फर्क पड़ता है,कि कौन मरता है प्यारे?हमने जिंदगी ........

जिंदगी काल के गाल,चंद लम्हों में सिमट जाती है !

shashwat सत्य के दिए की ,जीवन इक बाती है !!हमने जिंदगी .......
बोधी सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
प्रस्तुतकर्ता SAMVEDNA पर 8:59 AM 0 टिप्पणियाँ
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Tuesday, January 6, 2009

आस्था

में आस्था और अनुराग तले ,हर रोज़ छला जाता हूँ।
कल संभवतः कुछ बदले ,यह सोच चला जाता हूँ॥
मन के इस भ्रम को ,कब तक पालूँ?
मोम बना, जला जाता हूँ । में आस्था ............
सूर्य उगा और डूबा , यह भी सत्य नहीं है ,
फिर क्यों अर्घ्य ,ढला जाता हूँ ? मैं आस्था .........
सत्य ,असत्य में अन्तर कितना ?
बोधी सत्व हूँ, और गला जाता हूँ ।
मैं आस्था और अनुराग तले रोज़ छला जाता हूँ !!
बोधी सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७

Sunday, January 4, 2009

नव वर्ष की शुभकामनाएं






आप सब तक पहुंचे ,नव वर्ष की शुभकामनायें



सुख ,समृधि ,सर्वत्र महके ,है यही मम भावनाएं



अब ना कोई आतंकवाद का ,ज़ोर-ज़ुल्म आए राहों में,



हर मुमताज़ जीना चाहे ,शाहजहाँ की बाहों में



इश्क-मोहब्बत से ही पनपती हैं ,पुरानी-नयी सभ्यताएं



आप सब तक पहुंचें नव वर्ष की शुभ कामनाएं



अब तौबा करो ,तोप-तलवार और संगीन से,



नयी पीढी को सजाने दें ,सपने नए रंगीन से



खौफ से मिटती है ,विश्वास की मान्यताएं ,



आप सब तक पहुंचे ,नव वर्ष की शुभ कामनाएं



ज़ख्म से भी होता है दर्द ,मोहब्बत भी इसे जगाता है



विश्वास और इखलाख ,ख़ुद आतंकवाद को भागता है



दीवाना वहशीपन ,दरिंदगी थीं ,गए साल की विवशताएँ



आप सब तक पहुंचें ,नववर्ष की शुभ कामनाएं



बोधी सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७