Friday, April 24, 2015

इन्सानियत रोयेगी, शतरंज़ की मज़ार पर!

हर बरस लगेगे मेले शहीदो की मज़ार पर
पर कोई नही रोया ,उसके इस अयार पर !!
है नही केवल यह सबब इस ज़िन्दगानी का,
क्यूँ नही सोचा गजेन्द्र ने अगले गुबार पर!!
कोई किसी का खुदा बेशक कभी होता नही
माँ-बेटियों को क्यों छोड गया मझधार पर?
राजनीति चलती रहेगी माफ़ी की आड मे,
पर मानवता ठिठक गई है, इस बयार पर!!
कमीशन और इन्क्वायरी पर बैठेंगी बिसातें,
इन्सानियत रोयेगी, शतरंज़ की मज़ार पर!!

बोधिसत्व कस्तूरिया एड्वोकेट २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Wednesday, April 15, 2015

पेप्सी आईपीएल

खेल-खिलाडी बिक रहे ये कैसा इन्डिया का त्योहार?
लाखों यूनिट बिजली प्रतिदिन फ़ूँके,है कैसा व्यभिचार?
बिजली पानी को तरस रहे किसान,खेत और खलिहान
औद्दोगिक उत्पादन सिर पटके,सट्टेबाजी की जयकार!!
स्टूडैन्ट छोड पढाई,डेयरडेविल,नाईट राइडर्स पर खेले दाँव,
महिलायें तरस रही,कैसे देखें बहुओं पर सासू अत्याचार?
बुड्ढो ने चाहे जीवन मे कभी न खेली होय हाकी-क्रिकेट,
आस लगाये बैठे सारे,कब होवे चीयर्से-लीडर का दीदार?
४५ दिन को भूल गये सब शाम की बैठक,और गपशप,
सो गई संस्कृति सात तालों मे,है ६८ वर्षो का उपहार!!
पहले मुगलो,अंग्रेज़ों फ़िर अंग्रेज़ी-पिट्ठुओ के रहे गुलाम,
ऊपरी-कमाई मे डूबे,भूल गये"सादा जीवन उच्च विचार"!!
इस दुनिया मे सब कुछ बिकता है,यह है जीवन आधार,
पेप्सी आईपीएल लूटे कहकर"ये है इन्डिया का त्योहार?"

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा,आगरा २८२००७

Monday, April 13, 2015

बैसाखी दी लख लख् वधाईयाँ

गाते फ़िरें बैसाखी दी लख लख्  वधाईयाँ
कुडियाँ उछाला मारती ज्यो होवे सगाईयाँ!
उन्नू के दसियाँ चौपट हो गई फ़सलाँ ?
कुडियो कैवी खुशियाँ ओर कैवी वधाईयाँ?
फ़सलाँ दा त्योहार कैसे जट्ट मणावे ?
जब कुदरत की मार लगावे अँगडाईयाँ !!
झूठी-झूठी मण को दिलासा देवे  बेबे ,
कोई गल नही पुत्तर रब कीसौ परछाईयाँ !!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा२८२००७