हर बरस लगेगे मेले शहीदो की मज़ार पर
पर कोई नही रोया ,उसके इस अयार पर !!
है नही केवल यह सबब इस ज़िन्दगानी का,
क्यूँ नही सोचा गजेन्द्र ने अगले गुबार पर!!
कोई किसी का खुदा बेशक कभी होता नही
माँ-बेटियों को क्यों छोड गया मझधार पर?
राजनीति चलती रहेगी माफ़ी की आड मे,
पर मानवता ठिठक गई है, इस बयार पर!!
कमीशन और इन्क्वायरी पर बैठेंगी बिसातें,
इन्सानियत रोयेगी, शतरंज़ की मज़ार पर!!
बोधिसत्व कस्तूरिया एड्वोकेट २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
पर कोई नही रोया ,उसके इस अयार पर !!
है नही केवल यह सबब इस ज़िन्दगानी का,
क्यूँ नही सोचा गजेन्द्र ने अगले गुबार पर!!
कोई किसी का खुदा बेशक कभी होता नही
माँ-बेटियों को क्यों छोड गया मझधार पर?
राजनीति चलती रहेगी माफ़ी की आड मे,
पर मानवता ठिठक गई है, इस बयार पर!!
कमीशन और इन्क्वायरी पर बैठेंगी बिसातें,
इन्सानियत रोयेगी, शतरंज़ की मज़ार पर!!
बोधिसत्व कस्तूरिया एड्वोकेट २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
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