Wednesday, September 12, 2007

माँ भारती को नमन ! माँ शारदे ऐसे उदगार दो !
"जन गन मन " कि गुंजन को अब नया हुंकार दो !!
सरस्वती के साधको,लेखनी को नवधार दो !
लिख चुके बहुत प्रणय गीत,वीर रस पर सब वार दो !!
माँ भारती को ......................
स्वतंत्रता शिशु से नव योवना बनी ,अब उसे फिर श्रृंगार दो !
टेगोर , शरत, इक़बाल विस्मृत ना होन ,साहित्य को नव फुहार दो !!
माँ भारती को ......................
विज्ञानं की ऊंचाइयां ,विश्व में स्थापित कर चुके हम !
श्रम साधको ! वीर भारती हो तुम ,दुश्मनों पर अब प्रहार दो !!
माँ भारती को नमन ! माँ शारदे ऐसे उदगार दो

प्रीत कि रीत कितनी चुप कितनी शीत१
सुख देता अतीत, दुःख देता अतीत !
वर्तमान का प्रतिक्षण एक सुहाना गीत,
युग भी जाये पल दो पल में बीत!!
संशय भरे भविष्य कि घड़ियों से भयभीत ,
ना जाने कब छिन् जाये यह जीवन संगीत !!
दीपावली
कैसी तिमिराछादित मेरी अंतस अयोद्ध्या ?
कलियुग में रावन कर गया ,
राम को समूचा आत्मसात !
और दे गया ,
मेरे विवेक को पक्षाघात !
आशा के भग्नावशेष खडे हैं,
जीर्णोद्धार का भ्रम करने को !
दीपावली कितनी अक्षम है ,
शापित तम कम करने को !!
बोधि सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकन्दरा आगरा २८२००७