Tuesday, August 31, 2010

JANMASHTAMEE

क्रिष्ण पछ भादों , की वो थी रात अंधेरी,

कंस -अंत की जब बज उठी रण-भेरी !

कन्हाई ने जब मा-देवकी की थी पीड हरी,

उनके मुख से निकल पडा"जय -हरी ,हरी!

बन्दी-ग्रह मथुरा के खुल गये सारे ताले,

मारेगा उसको क्या?जो सारी दुनिया पाले!

सो गये सारे रक्छ्क भोर भये तक,

बासुदेव ले चले उन्हे नंद-गांव तक !

जमुनाजी कर रही थीं ता-ता थेया ,

आ गये ब्रज मे किशन- कन्हैय्या !
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

Friday, August 27, 2010

meree rachanaaye

मे्री रचनायें


मेरी रचनायें ,मे्री कविता नही मेरा जुनून है,

सामाजिक विषमताओं पर उबलता मेरा खून है!!

लेखनी के बाण कभी किसी को भेदते हैं,

कभी किसी को आह्लादित-किसी को छेदते हैं!! मेरी रचनायें........

मै सामाज़िक सौहाद्र,समन्वय पर लिखता नही,

जीवन असत्य है,लोगो को सत्य दिखता नही !! मेरी रचनायें.....

प्रेम की जिन्हे परिभाषा आती नही प्रेम पर लिखते हैं,

वासना को प्रेम से परोसते हैं,तभी ऊंचे फ़्रेम् पर दिखते हैं!! मेरी रचनायें....

पाप-पुण्य की परिभाषा नये संदर्भों मे बदल गई है,

स्वार्थ-परता,आज़ के सुख के सांचे मे ढल गई है !! मेरी रचनाये......

सत्य लिखने पर भी कहां मिलता सुकून है?

मेरी रचनाये, मेरी कविता नही मेरा जुनून है!! मेरी रचनाये....

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Thursday, August 26, 2010

rakhee 2010

राखी२०१०


पड रही कैसी रिमझिम बुंदिया फ़ुहार?

तन मे लागे आग मन मे जागे ज्वार !

झूले पड गये,पर ना झूले मनवा हमार,

कैसे मनाऊं अबकी राखी को त्योहार ? पड रही.......

सावन लागे भारी इबकी बार ,

जबरन जमीन लै रही ,जे ज़ालिम सरकार !

मै मैके नही जाऊंगी इबकी बार,

लैके रहूंगी अपनौ समपत्ती कौ अधिकार ! पड रही.......

इत सारे देस मा बाढ भरे हुंकार,

जामै डूब गयो खेत-खलिहान औ सारो संसार !

कैसे जाऊं मैके हो गयो बंटा धार,

मैके औ सासरे दोऊ की कैसे होवे नैया पार !

पड रही कैसी रिमझिम बुंदिया फ़ुहार !!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Saturday, August 14, 2010

15 agast 2010

स्वतन्त्रता के अमर शहीदों को सलाम,
तिरसठ वर्षों की बेबाक आज़ादी को प्रणाम!!
आज उनके ज़ज़्बे से हम आज़ाद हैं,
उनकी वतन परस्ती को गाते यह कलाम!! स्वतन्त्रता के........
कभी उनकी शहादत सुनकर रूह कांपती,
आज़ उनकी रूह से रूबरू होने का है काम!! स्वतन्त्रता के........
१८५७ से हो गई शुरू जंग-ए-आज़ादी ,
लक्ष्मी बाई,तात्या टोपे की हसरत का है नाम!! स्वतन्त्रता के....
चन्द्र शेखर,सुभाष,भगत सिंह राज गुरू,
हैं ऎसे अनेकों अनगिनत शहीदों का ये काम!! स्वतन्त्रता के.......
तीर-तलवार, हिन्द- सेना के साथ लेखनी ,
इकबाल- बिस्मिल शायरी ज़िसका था नाम !! स्वतन्त्रता के .....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २९२००७