Thursday, October 30, 2014

आज जयन्ती है  ,उस लौहपुरुष की ,
जिसने भारत को एक सूत्र मे पिरोया !!
आज पुण्य तिथि है उस महिला की,
जिसके प्रयाण पर सारा भारत रोया !!
भारतीय इतिहास की एतिहासिक तिथि,
जब हमने एक कुशल प्रशासक पाया,
आज ही एक कुशल प्रशासक खोया !!
है नियति का नियम सबको मान्य,
उसने वही पाया है जो जिसने बोया !!
देश हित के लिये दोनो का समर्पण,
कैसे हो विस्मॄत,चिरनिद्रा मे सोया !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Thursday, October 23, 2014

दीपोत्सव

पंच महोत्सव की हा्र्दिक शुभ कामनायें !
धन्वन्तरि जयन्ती की स्वस्थ धारणायें !!
धन-कुबेर से समॄद्ध हो इस पावन-पर्व से,
खुशियाँ सर्वत्र महके,है यही मम भावनायें !!
धरा से गगन तक खुशी ही  लहलहाये,
गरीबी से न आहत हो कोई सम्वेदनायें !!
चतुर्दशी को "भारत स्वच्छ’विस्मॄत न हो,
तभी बरसेंगी धनलछ्मी की समभावनाये!!
दीपोत्सव करे ज्योतिर्मय भारतवर्ष को,
साकार हो उठें "राम-राज्य"की कल्पनायें !!
कॄष्ण सी प्रखर हो गोवर्धन की  आस्था,
तभी सम्भव है ग्राम्य जीवन सफ़लतायें !!
दौज़ के पावन पर्व मे छिपी है सम्मान,
और नारी की अस्मिता की नई दिशायें!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुज सिकन्दरा आगरा २८२००७

अयोध्या का धोबी

न दशहरे के रावण से किसी ने सीख ली
न राम के आदर्श को कोई सीख पाया !!
दुर्भाग्य हम राम के देश मे पैदा हो गये,
इसीलिये गाँधी भी कभी नही चीख पाया!!
हाँ धीरे से बोले "हे राम!" शान्त हो गये,
जयन्ती होती है,आचरण नही दीख पाया!!
जो कभी कोई अनुसरण करता भी है तो,
अवसरवादी पीछे ढकेल कर सत्ता पा गये,
नेहरू हो या केज़रीवाल वही दीख पाया !!
य़ूँ राम राज्य की परिकल्पना व्यर्थ होगी,
क्योकि अयोध्या का धोबी नही चीख पाया !
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Friday, October 3, 2014

विजया दश्मी की शुभ कामनायें !

आप तक पहुँचे विजया दश्मी की शुभ कामनायें !
कर दो पराजित ,अन्तः करण की   दुर्भावनाये !!
जागॄत करो मर्यादा पुर्षोत्तम राम सा आत्म संयम,
भेद दो अहं, स्वार्थ और वासना की सम्भावनायें !!
जीत लो प्रेम और विशवास से विश्व की  धारायें,
धरा पर अवतीर्ण हो्गी,राम-राज्य की कल्पनायें !!
स्वजन और परिजन से परे, विश्व-बन्धुत्व होगा,
गूँजेगी तभी हिन्दुत्व के प्रथम प्रष्ठ की रचनायें !!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Wednesday, October 1, 2014

गाँधी और लाल बहादुर को शत शत नमन

गाँधी और लाल बहादुर को शत शत नमन,
है अर्पित उन्के चरणो मे श्रद्धा रूपी सुमन !!
कर्ज़ तुम्हारा कैसे उतारेंगे, हम हिदुस्तानी ?
भ्रटाचार युक्त हो गई यह,धरा और  पवन !!
कोई तुमसा संत संक्ल्प स्वछता का लेगा,
यह धरा ही नही,समाज भी होगा उपवन !!
चलो आज शपथ उठायें ये,हम भारतवासी !
घर-आँगन की तरह सजाये अपना वतन !!
सड्कों पर अब नही, एक तिनका फ़ेंकेगे ,
गर करे कोई तो,उसका होगा निष्का्सन !!
धर्म आस्था के पावन पर्व अब वही होंगे,
जहाँ स्वच्छ होगी नदियाँ और पर्यावरण !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा आगरा २८२००