Sunday, December 28, 2008

ज़रदारी को पैगाम

कब तलक हम विश्व को ,शान्ति-अहिंसा का पाठ पढ़ते रहेंगे?

बार-बार गोडसे,राज रतनम और कसाब आते रहेंगे!!

शान्ति-अहिंसा के पुजारी मरते रहेंगे,गाँधी,इंदिरा हों या राजीव !

जब तलक कोई क्यों अर्जुन, नही उठाएगा फिर से अपना गांडीव !!

kyon करें हम उससे ,आतंकी सफाए की उम्म्मीद ?

जिसने पायी हो सत्ता ,अपनी बेगम करके शहीद !कब talak ........
bodhi satva kastooiya

Wednesday, December 24, 2008

तकदीर

अपनी-अपनी तकदीर पर हर कोई रोया है !
कोई अब तक रो रहा ,तो कोई रो-रो के सोया है !!
किसी ने कुछ नही पाया ,वो तो रोया सही 'लेनिन' !
पर किसी ने सब कुछ पाकर भी चंद लम्हों में सब खोया है !!अपनी -अपनी....
किसी को और थोड़ा ,और की ललक ने रुलाया !
मगर कुछ ने ता-उम्र कमा के फिर यूँ ही धोया है !!अपनी-अपनी.......
ऐसे तो हर किसी को ,उससे गिला- शिकवा है !
पर उनकी क्या कहे 'लेनिन' जो तेरे दर पर भी aake रोया है अपनी- अपनी ......
bodhi satva kastooriya

Saturday, December 20, 2008

आतंकवाद


पहले हम धर्म, जाति,भाषा ,के नाम पर बटरहे थे !


अब अपने ही देश में, प्रांतीयता पर कट रहे हैं !!


इधर हम दशहरे पर ,गली-मुहल्ले में रावन जला रहे हैं !


उधर राज सरीखे रावन,राजनीति की दुकान चला रहे हैं!!


उसकी ही परणीती है ,ताज, नरीमन और ओबेराई की घटनाएँ !


देश पर आतंक हमारी देन है , चलो इन्हे समझाए !