Sunday, August 31, 2008

मंजिल


कुछ तेज़ हवाएं हैं ,कुछ बर्फानी गलन !
मझधार में है नैया ,दूर कहीं अपना है वतन !!

जीवन नदिया में, तकलीफों की लहरें!

हर रोज़ मिली हैं ,पीडाओं की नहरें !!

क्या सोच के निकला था ,भूल गया अपनी वो लगन !!कुछ तेज़....

असफलताओं की भवरों से ,जाने क्यों डरता हूँ ?

आशा की पतवारों से ,फ़िर आगे बढ़ता हूँ !

जो पार निकल बेठे ,उनसे कैसी हो जलन!! कुछ तेज़.........

असफलता की भवरों में ,लाखों ने जान गँवाई !

पार पहुँचने वालों ने ,धीरज की धाक जमाई !!

मंजिल की खुशी में , भूल गए वो सारी थकन !! कुछ तेज़ ...........

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

Sunday, August 24, 2008

कृष्ण जन्माष्टमी


कैसा सुंदर सा प्यारा सा लाला ,मेरा गोविंदा श्याम गोपाला !
ब्रिज -मंडल में बाजे बधाई, ऐसी सुंदर सी छवि सबको है भाई
नाचें ब्रिज के सब गोपी औ -ग्वाला , मेरा गोविंदा श्याम गोपाला !!कैसा सुंदर ......
जसुमति का है यह तो कन्हाई ,किसी ने इसको नज़र जो लगाई
कर दूँगी उसका मुहँ काला, मेरा गोविंदा श्याम गोपाला !!कैसा सुंदर .....
नन्द बाबा का है यह तो खिलौना ,मेरा छौना है सबसे सलोना
कितने नाजों से इसको है पाला ,मेरा गोविंदा श्याम गोपाला !! कैसा सुंदर ...
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

Saturday, August 9, 2008

सवेरा

जब जब होता है सवेरा
उषा और सूर्य का होता फेरा !
रात का कितना हो घटा टॉप अँधेरा ,
रात होती है परायी ,नव दिवस है मेरा !!जब जब .........
काल का चक्र घूमता है किस दिशा ,
आज तक जाना न कोई -मेरा है या तेरा !! जब जब.......
सुबह की लालिमा है चितेरी ,
शाम होते होते होते छा जाएगा अँधेरा !!........
नित सुबह मैं फिर जनम लेता हूँ,
अज्ञान हूँ आज फिर कहाँ लगेगा यह डेरा!! जब जब.....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७