मैने तुम्हे स्वर दिया, तुम इसे आवाज़ दो!
छेडा जो राग मैने, तुम इसे इक साज़ दो!!
पथ-प्रदर्शक हम बने,तो तुम बनो अनुयायी,
विश्व हो अचम्भित, और सभी को नाज़ हो!!
है समृद्ध संस्कृति हमारी,संग्रहीत तुम करो,
गिरने न पाए इस पर,गर कोई गाज़ हो!!
विरोध के स्वर क्यों इतने गम्भीर हो गये?
अपने अपनो पर झपटें,ज्यों कोई बाज़ हो!!
सरकारी-समपत्ति किसने की हवाले आग के?
देश-द्रोह से लिप्त,छिपा इसमे कोई राज़ हो!!
अपने-परायों को चिन्हित करने का वक्त है,
है अपेछा आपसे,समझ दारी अब आज हो!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा आगरा२८२००७
छेडा जो राग मैने, तुम इसे इक साज़ दो!!
पथ-प्रदर्शक हम बने,तो तुम बनो अनुयायी,
विश्व हो अचम्भित, और सभी को नाज़ हो!!
है समृद्ध संस्कृति हमारी,संग्रहीत तुम करो,
गिरने न पाए इस पर,गर कोई गाज़ हो!!
विरोध के स्वर क्यों इतने गम्भीर हो गये?
अपने अपनो पर झपटें,ज्यों कोई बाज़ हो!!
सरकारी-समपत्ति किसने की हवाले आग के?
देश-द्रोह से लिप्त,छिपा इसमे कोई राज़ हो!!
अपने-परायों को चिन्हित करने का वक्त है,
है अपेछा आपसे,समझ दारी अब आज हो!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा आगरा२८२००७
