Monday, October 12, 2009

दीपावली


माटी के चाक पर घूमते हैं दिए ,महगाई की मार पर भी कुछ ने लिए !

आखिर दीपावली आई है ..........

सिर्फ़ दिए से दीपावली कैसे मनती? रुई और तेल के लिए ग्रहणी सर धुनती !

आखिर दीपावली आई है .......

त्यौहार पर प्रधानमंत्री की बधाई , शून्य से भी नीचे हो गई महगाई !

आखिर दीपावली आई है ...........

न जाने भगवन ,हम कबतक छले जाते रहेंगे? या फ़िर सरकार से कुछ कहेंगे?

आखिर दीपावली आई है ............

पता नहीं हिंदू क्यों इतने त्यौहार मनाते हैं?घर में नहीं हैं दाने फ़िर क्यों भुनाते हैं?

आखिर दीपावली आई है...?

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

Sunday, October 11, 2009

रमजान


आया -आया रमजान का मुक़द्दस महिना ,

रोजेदारों पे रहमत उसीकी -डूबे कभी न सफीना !

.peer-मुर्शिद कहते हैं ''काम कर तू ऐसा -

तकलीफ हो किसी को कभी ना ! "

सजदे में उसके जिसका भी सर झुका,

आसान हो गया उसका ही जीना !

हो मुसलमान मुसलसल ईमान रख ,

क्या बिगाडेगा कोई चाहे हो कितना कमीना !

अल्लाह पर रख ऐतबार तू

वोह ही करेगा आसान तेरा जीना !

मिलता है सबब उसीको,

जिसने कभी किसी से कुछ न छीना !

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007