Sunday, March 8, 2009

नारी


नारी !तुम पत्नी,मां और बहना हो ।
तुम सेंदुर ,आँचल और कंगना हो ॥
नारी! तुम स्वप्न सलोना हो ।
फ़िर भी मर्दों का एक खिलौना हो ॥ नारी तुम.......
तुम गायत्री,सरस्वती और लक्ष्मी हो।
तुम कर्मभूमि का चंदन और भस्मी हो॥ नारी तुम .....
नारी! तुम मर्दों की जननी हो ।
उसकी अर्धागिनी और सजनी हो ॥ नारी तुम .....
तुम मर्दों की भोग्या और सेवी हो ।
फ़िर भी कहलाती उसकी देवी हो ॥ नारी तुम.....
मर्दों ने विश्वास जीत ,हर बार ठगा है ।
विश्वासघात कर कहता -वो तेरा सगा है ॥ नारी तुम .....
न जाने तुम कब तक भोली - अबला रहोगी?
आज करो संकल्प -तुम अब सबला बनोगी ॥ नारी तुम.....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७