Tuesday, February 24, 2015
Friday, February 13, 2015
देखी नही
इस कदर राजनीतिक बेचारगी देखी नही !
एक दूजे पर तंज़ की आवारगी देखी नही!!
अब गले मिलने से भी है क्या फ़ायदा ?
आईने उतार दी जो,वो ख्वारगी देखी नही!!
पढे-लिखे होने का जो स्वांग करते रहे,
ज़हालत की ऐसी, बानगी कभी देखी नही!!
पढे-लिखे बैठे रहे बस, बन्द कमरों मे !
सडक छापों ने छापी शानकी देखी नही !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा,आगरा २८२००७
एक दूजे पर तंज़ की आवारगी देखी नही!!
अब गले मिलने से भी है क्या फ़ायदा ?
आईने उतार दी जो,वो ख्वारगी देखी नही!!
पढे-लिखे होने का जो स्वांग करते रहे,
ज़हालत की ऐसी, बानगी कभी देखी नही!!
पढे-लिखे बैठे रहे बस, बन्द कमरों मे !
सडक छापों ने छापी शानकी देखी नही !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा,आगरा २८२००७
Friday, February 6, 2015
सूरज अभी डूबा नही,
सूरज अभी डूबा नही,
ज़रा शाम होने तो दो !
मैं खुद ही लौट आऊंगा,
ज़रा नाकाम होने तो दो !!
क्यूँ बदनाम करते हो ?
ज़रा सा नाम होने तो दो!!
लगी है,अभी-अभी आँख,
ज़रा चैन से सोने तो दो !!
उसे ढूँढ ही लूँगा बज़्म मे,
शमा रौशन होने तो दो !!
कैसी गफ़लत है ज़नाब ?
गम मे किसी खोने तो दो!!
हँसता रहा ता ज़िन्दगी,
मय्यत पर ही रोने तो दो!!
गैरों के शेरों से थे नाम्चीं,
अपने भी कुछ होने तो दो!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
ज़रा शाम होने तो दो !
मैं खुद ही लौट आऊंगा,
ज़रा नाकाम होने तो दो !!
क्यूँ बदनाम करते हो ?
ज़रा सा नाम होने तो दो!!
लगी है,अभी-अभी आँख,
ज़रा चैन से सोने तो दो !!
उसे ढूँढ ही लूँगा बज़्म मे,
शमा रौशन होने तो दो !!
कैसी गफ़लत है ज़नाब ?
गम मे किसी खोने तो दो!!
हँसता रहा ता ज़िन्दगी,
मय्यत पर ही रोने तो दो!!
गैरों के शेरों से थे नाम्चीं,
अपने भी कुछ होने तो दो!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
Thursday, February 5, 2015
दिल्ली जीतेंगे!
पहले जीता भारत, अब भारत का दिल-दिल्ली जीतेंगे!
विश्व बन्धुत्व का मंत्र, अब दुनिया वाले हमसे सीखेंगे !!
न कोई छोटा और न कोई बडा होगा,ये सुन ले दुनिया,
देश दीवारों मे नही कैद हो, न अब सीमांओ को खीचेंगे!!
भारत रहा सदा से,संस्कॄति,धर्म और आध्यात्म का गुरु,
प्रेम-सदभाव,और सहिष्णुता से, इस बगिया को सीचेंगे !!
सत्य,अहिंसा की प्रतिमूर्ति,बापू-गाँधी की है शपथ तुम्हे !
आतंक्वाद और अत्याचार से,अब कभी ना आँखे मीचेंगे !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुँज, सिकन्दरा आगरा २८२००७
विश्व बन्धुत्व का मंत्र, अब दुनिया वाले हमसे सीखेंगे !!
न कोई छोटा और न कोई बडा होगा,ये सुन ले दुनिया,
देश दीवारों मे नही कैद हो, न अब सीमांओ को खीचेंगे!!
भारत रहा सदा से,संस्कॄति,धर्म और आध्यात्म का गुरु,
प्रेम-सदभाव,और सहिष्णुता से, इस बगिया को सीचेंगे !!
सत्य,अहिंसा की प्रतिमूर्ति,बापू-गाँधी की है शपथ तुम्हे !
आतंक्वाद और अत्याचार से,अब कभी ना आँखे मीचेंगे !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुँज, सिकन्दरा आगरा २८२००७
Tuesday, February 3, 2015
मधुर-मिलन
तुम सबसे सुन्दर हो
उससे सुन्दर बतियाँ !
पास नही हूँ अब तेरे,
आस निहारे अखियाँ !!
मन-मन्दिर मे झाँकूं,
कैसे मिलेंगी सखियाँ ?
हर जतन अकारथ है,
बीत रही अब रतियाँ !!
रात चाँदनी लिखती है,
प्यार भरी वो बतियाँ !!
अपने अंक भरूँ तुझको,
जाग न पायें सखियाँ !!
हर आहट है अहसास,
मधुर-मिलन-बतियाँ !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा आगरा २८२००७
उससे सुन्दर बतियाँ !
पास नही हूँ अब तेरे,
आस निहारे अखियाँ !!
मन-मन्दिर मे झाँकूं,
कैसे मिलेंगी सखियाँ ?
हर जतन अकारथ है,
बीत रही अब रतियाँ !!
रात चाँदनी लिखती है,
प्यार भरी वो बतियाँ !!
अपने अंक भरूँ तुझको,
जाग न पायें सखियाँ !!
हर आहट है अहसास,
मधुर-मिलन-बतियाँ !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा आगरा २८२००७
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