Saturday, March 13, 2010

दर्द


मेरे दर्द से किसी को गिला नही,
कोई दर्द बांट्ने वाला मिला नही!!
जिसे कभी चाहा वो तो मिला नही,
येही दर्द हैजिसका कोई सिलसिला नही!!
काश वो होते मेरी शरीके-हयात,
दर्द होने पर भी कह्ते कि -कोई मिला नही!!
जिसे चाहने की हसरत दिल मे दबी है,
उससे भी कोई शिकवा और गिला नही !!
मेरे रब् को था येही मन्ज़ूर,
सबको बांट्कर भी मेरे लिये वो हिला नही!!
हर किसी की चाहत उसे नसीब नही,
इसीलिये -उससे भी मुझे कोई गिला नही!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा -२८२००७
मो:०९४१२४४३०९३

Thursday, March 11, 2010


एक बार भरी पिचकारी,
उसने जो मोपे मारी,
मै भीज़ गई थी सारी-
पहले तो मैने उसे दी गारी!
जब उसकी आई बारी,
उसने दी मीठी हुँकारी-
मै हो गई बलिहारी !!एक बार........
जब आई मिलन कि बारी,
मै काँप रही थी भारी,
फ़िर हो गया मिलना जारी-
आज तलक हूँ उनकी प्यारी! एक बार......
बोधिसत्व क्स्तूरिया २०२ नीरव निकुँज सिकन्दरा आगरा २८२००७

Wednesday, March 10, 2010

मानव मूल्य


हूँ व्योपारी, पर मानव मूल्यों का व्योपार नहीं करता !

जब लेखनी हाथ उठा लूं ,फिर नहीं किसी से डरता !!

राम,श्रवन की बातें, अब केवल इतिहास हो गईं !

मानव मूल्यों का परिवर्तन ,केवल प्रयास हो गईं !!

मात-पिता हेतु कांवेर नहीं ,मीठा संबोधन काफी है !

पितृ आदेश हेतु बनवास नहीं ,अपनापन ही काफी है !!

भरत सम भाई नहीं बन सकते ,सहोदर बनकर देखो !

मानव मूल्यों पर अमल करो,दूजे को खुशियाँ देकर देखो !!

घर-परिवार,समाज , सब तुम पर गर्व करेंगे !

राष्ट्र- धरोहर हो तुम, भारतीय समाजको धन्य करेंगे!!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

एकाकी सब सून


कागज़ ,कलम, और दवात, एकाकी सब सून !

लड़का ,लड़की ,और बरात,एकाकी सब सून !!

तम्बू, कुर्सी, और कनात, एकाकी सब सून !

ईटा, गारा, और परात , एकाकी सब सून !!