Saturday, March 13, 2010

दर्द


मेरे दर्द से किसी को गिला नही,
कोई दर्द बांट्ने वाला मिला नही!!
जिसे कभी चाहा वो तो मिला नही,
येही दर्द हैजिसका कोई सिलसिला नही!!
काश वो होते मेरी शरीके-हयात,
दर्द होने पर भी कह्ते कि -कोई मिला नही!!
जिसे चाहने की हसरत दिल मे दबी है,
उससे भी कोई शिकवा और गिला नही !!
मेरे रब् को था येही मन्ज़ूर,
सबको बांट्कर भी मेरे लिये वो हिला नही!!
हर किसी की चाहत उसे नसीब नही,
इसीलिये -उससे भी मुझे कोई गिला नही!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा -२८२००७
मो:०९४१२४४३०९३

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