Sunday, May 9, 2010

माँ की ममता

मां की ममता
कोई नही समता!
धैर्य की प्रबल छमता
स्नेह आवेग नही थमता!
इतिश्री है प्यार की,
सीमा नही दुलार की!
उसके ज़िगर का टुकडा,
नही समझता उसका दुखडा!
वो समन्दर है प्यार की,
समा जाती है नदिया दुलार की!
उसके प्यार का नही पारावार,
उसकी झिड्की मे ही तेरा उद्धार!
बोधिसत्व कस्तूरिया२०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

No comments: