Friday, February 13, 2015

देखी नही

इस कदर राजनीतिक बेचारगी देखी नही !
एक दूजे पर तंज़ की आवारगी देखी नही!!
अब गले मिलने से भी है क्या फ़ायदा ?
आईने उतार दी जो,वो ख्वारगी देखी नही!!
पढे-लिखे होने का जो स्वांग करते रहे,
ज़हालत की ऐसी, बानगी कभी देखी नही!!
पढे-लिखे बैठे रहे बस, बन्द कमरों मे !
सडक छापों ने छापी शानकी देखी नही !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा,आगरा २८२००७

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