
आया -आया रमजान का मुक़द्दस महिना ,
रोजेदारों पे रहमत उसीकी -डूबे कभी न सफीना !
.peer-मुर्शिद कहते हैं ''काम कर तू ऐसा -
तकलीफ हो किसी को कभी ना ! "
सजदे में उसके जिसका भी सर झुका,
आसान हो गया उसका ही जीना !
हो मुसलमान मुसलसल ईमान रख ,
क्या बिगाडेगा कोई चाहे हो कितना कमीना !
अल्लाह पर रख ऐतबार तू
वोह ही करेगा आसान तेरा जीना !
मिलता है सबब उसीको,
जिसने कभी किसी से कुछ न छीना !
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

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