Sunday, October 11, 2009

रमजान


आया -आया रमजान का मुक़द्दस महिना ,

रोजेदारों पे रहमत उसीकी -डूबे कभी न सफीना !

.peer-मुर्शिद कहते हैं ''काम कर तू ऐसा -

तकलीफ हो किसी को कभी ना ! "

सजदे में उसके जिसका भी सर झुका,

आसान हो गया उसका ही जीना !

हो मुसलमान मुसलसल ईमान रख ,

क्या बिगाडेगा कोई चाहे हो कितना कमीना !

अल्लाह पर रख ऐतबार तू

वोह ही करेगा आसान तेरा जीना !

मिलता है सबब उसीको,

जिसने कभी किसी से कुछ न छीना !

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

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