
पहले हम धर्म, जाति,भाषा ,के नाम पर बटरहे थे !
अब अपने ही देश में, प्रांतीयता पर कट रहे हैं !!
इधर हम दशहरे पर ,गली-मुहल्ले में रावन जला रहे हैं !
उधर राज सरीखे रावन,राजनीति की दुकान चला रहे हैं!!
उसकी ही परणीती है ,ताज, नरीमन और ओबेराई की घटनाएँ !
देश पर आतंक हमारी देन है , चलो इन्हे समझाए !

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