Wednesday, December 24, 2008

तकदीर

अपनी-अपनी तकदीर पर हर कोई रोया है !
कोई अब तक रो रहा ,तो कोई रो-रो के सोया है !!
किसी ने कुछ नही पाया ,वो तो रोया सही 'लेनिन' !
पर किसी ने सब कुछ पाकर भी चंद लम्हों में सब खोया है !!अपनी -अपनी....
किसी को और थोड़ा ,और की ललक ने रुलाया !
मगर कुछ ने ता-उम्र कमा के फिर यूँ ही धोया है !!अपनी-अपनी.......
ऐसे तो हर किसी को ,उससे गिला- शिकवा है !
पर उनकी क्या कहे 'लेनिन' जो तेरे दर पर भी aake रोया है अपनी- अपनी ......
bodhi satva kastooriya

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