में आस्था और अनुराग तले ,हर रोज़ छला जाता हूँ।
कल संभवतः कुछ बदले ,यह सोच चला जाता हूँ॥
मन के इस भ्रम को ,कब तक पालूँ?
मोम बना, जला जाता हूँ । में आस्था ............
सूर्य उगा और डूबा , यह भी सत्य नहीं है ,
फिर क्यों अर्घ्य ,ढला जाता हूँ ? मैं आस्था .........
सत्य ,असत्य में अन्तर कितना ?
बोधी सत्व हूँ, और गला जाता हूँ ।
मैं आस्था और अनुराग तले रोज़ छला जाता हूँ !!
बोधी सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment