
मानव तू क्यों ,इतना निष्ठुर और नाराज़ हो गया?
क्या यह विश्व-युद्ध का फ़िर से आगाज़ हो गया ?
पहले युद्ध शुरू होने से पहले,दुन्ध्भी बजा करती थी !
पर अब तो क्रूर आतंकियों का ,मन-भावन साज़ हो गया !!मानव तू क्यों ........
कहाँ गई गीता ,गाँधी, और ईसा की वाणी ?
मानव तो पशु हो गया,येही हमारा समाज हो गया !!मानव तू क्यों .........
इन अंधे - बहरों की ज़मात को, कौन पढाये ज्ञान ?
इसी लिए शालीन पुरूष भी अब,अपनी आवाज़ खो गया !!मानव तू क्यों .......
फिर अवतीर्ण हो जाओ प्रभू,चाहे इक और कुरुक्षेत्र हो जाए !
उसके बाद कहें सभी, शान्ति-समृधि का राम-राज हो गया !!मानव तू क्यों ......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा-२८२००७
क्या यह विश्व-युद्ध का फ़िर से आगाज़ हो गया ?
पहले युद्ध शुरू होने से पहले,दुन्ध्भी बजा करती थी !
पर अब तो क्रूर आतंकियों का ,मन-भावन साज़ हो गया !!मानव तू क्यों ........
कहाँ गई गीता ,गाँधी, और ईसा की वाणी ?
मानव तो पशु हो गया,येही हमारा समाज हो गया !!मानव तू क्यों .........
इन अंधे - बहरों की ज़मात को, कौन पढाये ज्ञान ?
इसी लिए शालीन पुरूष भी अब,अपनी आवाज़ खो गया !!मानव तू क्यों .......
फिर अवतीर्ण हो जाओ प्रभू,चाहे इक और कुरुक्षेत्र हो जाए !
उसके बाद कहें सभी, शान्ति-समृधि का राम-राज हो गया !!मानव तू क्यों ......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा-२८२००७

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