Friday, April 8, 2016

नव संम्वत्सर २०७३,नूतन जागृति का उदघोष!

नव संम्वत्सर २०७३,नूतन जागृति का उदघोष! चारो दिशायें भर रही,,मानव मे स्फ़ूर्ती औरजोश!! खेत-खलिहानप्रतिपदा,ज्यों कर रही हो यूँ सन्धि! धन्य हर मानव मे है, सुवासित सरसों की सुगन्धि, हरधर्म और जाति"भारत माता की जै"मे मदहोष!!नव संम्वत्सर..... किस धर्म-ग्रन्थ मे लिखा है,मादरे वतन से बेवफ़ाई, किन धर्म गुरूओं और उलेमाओं ने,आग है ये लगाई? जिस माटी मे पले-बढे,जहाँ मिले राम-रहीम से भाई, मुस्सलसल ईमान न रखे वो नही मुसल्मान जोश!!नव संम्वत्सर ...

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