Tuesday, September 30, 2014

मशविरा

कभी किसी और से उसकी बातें न कर,
वो भी कही उसका दीवाना ना हो जाये!
है इश्क वो हसरत ,जिसको छुपाने से,
मिठास ऐसी, दिनो-दिन बढती ही जाये !!
गर कर दिया एलान,उसका सारे जहाँ,
खुद तो मरोगे और वो रुसवा हो जाये !!

है इश्क वो आतिश गालिब जो जलाये,
वो जले ही,औरो का बेडा गर्क हो जाये !!
है मशविरा मेरा यह ,इश्क के परिन्दों से,
ज़ल्द अपनाले उसे,कहीं फ़ुर्र न हो जाये !!
बोधिह्सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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