Monday, September 1, 2014

हर किसी से कभी दिल की बात नही कहना,

हर किसी से कभी दिल की बात नही कहना,
गर कोई बदनियत हो जाय,ज़ुल्म मत सहना !!हर किसी से कभी दिल 
है मशविरा उन सभी ना समझ बच्चियों को ,
प्यार के झूठे भुलावे मे ,न कभी यों ही बहना !!हर किसी से कभी दिल 
खुद बखुद आप गौर इस बात पर तो कीजिये,
क्यो इस कदर महरबान, दे रहा उपहार-गहना !!हर किसी से कभी दिल 
हर किसी को शक की निगाह से मत देखिये,
पर हर निगाह को भी, मत समझना अपना !!हर किसी से कभी दिल 
ज़ुल्म की हर इबारत, बर्दाश्त से शुरू होती है,
मोहब्बत के फ़रेब को,हमेशा तौबा ही कहना !!हर किसी से कभी दिल 

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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