Thursday, September 4, 2014

शिछक दिवस

विद्या-मन्दिर अच्छा खासा बाज़ार हो गया,
प्रमाण-पत्र क्रय-विक्रय का व्यौपार हो गया !
गाँव-गाँव मे पढे-लिखों का अम्बार हो गया,
विद्या-मन्दिर अच्छा खासा बाज़ार हो गया !!

शिछक कितना,      अब लाचार हो गया ?
पुत्र उसी का ,अब गुण्डों का सरदार हो गया,
कछा मे आ जाके , तो आभार   हो गया !
विद्या-मन्दिर अच्छा खासा बाज़ार हो गया !!

विषय-बोझ से लदा शिष्य, बीमार हो गया,
नित-नूतन पाठ्य-क्रम,कुतुब मीनार हो गया !
शिछा-नीति बदलना,  एक त्यौहार हो गया,
विद्या-मन्दिर अच्छा खासा  बाज़ार हो गया !!

राजनीति से  सरस्वती को प्यार हो गया,
उसके वीणा का सुर, अब नाकार हो गया !
शिछक पिटना, दैनिक समाचार हो गया,
विद्या-मन्दिर अच्छा खासा बाज़ार हो गया  !!

बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दर आगरा २८२००७

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