फ़िर कीचड से कमल खिला है,
तुष्टीकरण वालों का दिल हिला है!
कैसे फ़ेल हो गया अबकी पासा,
काँग्रेस,सपा सबकी टूट गई आसा!
कैसे वोट-बैंक टूटा यह मन्थन ज़ारी है!!फ़िर कीचड से कमल खिला है,
जाति-पाँति से बडा राष्ट टूटते देखे,
सभ्य समाज के नही यह सब लेखे !
धर्म-जाति पर विकास,सुशासन भारी है!!फ़िर कीचड से कमल खिला है,
अब कैसे हवा-हवाई किले बनेगे ?
कैसे बेटे-बेटी और भतीजे पलेगे ?
सोच सोच छेत्रीय राजनीति फ़िर हारी है!!फ़िर कीचड से कमल खिला है,
अब कैसे चढ गुण्डों की छाती पर,
"मुहर लगेगी हाथी पर"!
कह दलित की बेटी कब तक ठगती?
महल-दुमहले बना कहती अबला नारी है!! फ़िर कीचड से कमल खिला है,
६७ वर्षो तक ठगी गई यह जनता कहती,
"सिंहासन खाली करो" अब उसकी बारी है!!
नई चुनौती और नई अपेछाएं हैं,
"सबका साथ-सबका विश्वास"
केवल यही नीति,अब सब पर भारी है!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
तुष्टीकरण वालों का दिल हिला है!
कैसे फ़ेल हो गया अबकी पासा,
काँग्रेस,सपा सबकी टूट गई आसा!
कैसे वोट-बैंक टूटा यह मन्थन ज़ारी है!!फ़िर कीचड से कमल खिला है,
जाति-पाँति से बडा राष्ट टूटते देखे,
सभ्य समाज के नही यह सब लेखे !
धर्म-जाति पर विकास,सुशासन भारी है!!फ़िर कीचड से कमल खिला है,
अब कैसे हवा-हवाई किले बनेगे ?
कैसे बेटे-बेटी और भतीजे पलेगे ?
सोच सोच छेत्रीय राजनीति फ़िर हारी है!!फ़िर कीचड से कमल खिला है,
अब कैसे चढ गुण्डों की छाती पर,
"मुहर लगेगी हाथी पर"!
कह दलित की बेटी कब तक ठगती?
महल-दुमहले बना कहती अबला नारी है!! फ़िर कीचड से कमल खिला है,
६७ वर्षो तक ठगी गई यह जनता कहती,
"सिंहासन खाली करो" अब उसकी बारी है!!
नई चुनौती और नई अपेछाएं हैं,
"सबका साथ-सबका विश्वास"
केवल यही नीति,अब सब पर भारी है!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७


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