Wednesday, December 17, 2014

फ़ेस बुक?

चेहरों की कैसी ज़मात है
फ़ेस बुक?
अपनी-अपनी भडास है फ़ेस बुक!
कही सुन्दर साहित्यिक रचनायें है,
कही गन्दगी की संडास है फ़ेस बुक!!
बेहूदगी है या रोमाँस है फ़ेस बुक ?
शिछा औ ग्यान का डाँस फ़ेस बुक !
कुछ नया रचने की तमन्नाओ से,
ग्रसित युवकों का चाँस है फ़ेस बुक!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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