कैसे बदले बदले गाँव ?
नही मिल रही है छाँव !
बद्ध-बैल गायब है सब,
ट्रैक्टर-ट्राली पसारें पाँव!!
मेल-मुहब्बत नही मिले,
इक-दूजे पर मारें दाँव!!
हर आँगन मे दीवारें है,
कऊए सी कर रहे काँव!!
साडी-बिलोज़ न दीखें,
जीन्स-टाप की है छाँव!!
लल्ला चले गये लन्डन,
खँडहर ह्वे गये हैं गाँव!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा ,आगरा २८२००७
नही मिल रही है छाँव !
बद्ध-बैल गायब है सब,
ट्रैक्टर-ट्राली पसारें पाँव!!
मेल-मुहब्बत नही मिले,
इक-दूजे पर मारें दाँव!!
हर आँगन मे दीवारें है,
कऊए सी कर रहे काँव!!
साडी-बिलोज़ न दीखें,
जीन्स-टाप की है छाँव!!
लल्ला चले गये लन्डन,
खँडहर ह्वे गये हैं गाँव!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा ,आगरा २८२००७

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