Monday, March 16, 2015

होली का त्यौहार

हर किसी के ज़हन मे इश्क सवार है
है ये बदहवासी या होली का बुखार है?
हर कोई अपने ही रंग मे सराबोर है,
हर किसी को अपनी का इन्त्ज़ार है!!
ना बोलियों का ,ना मज़हब का बैर,
इतनी मुहब्ब्त कि मौला भी बेज़ार है!!
कया इसी दिन के लिये पूरे साल,
दंगे-फ़साद करते है,?येकैसा प्यार है!!
सब मिलके नाचो-गाओ एक साथ,
कि आया फ़िर होली का त्यौहार है!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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