गर गद्दार छुपे है सीमा पर ,
कमी नही है पहरेदारों की !
भून-भून के रख देगे छाती
हम मसरत के रखवारो की!!
वक्त गया छमा-याचना का,
आया तीर,तोप,तलवारों की!!
भूल गये सबक बाँग्ला देश,
और कारगिल के मारों की ?
"सबका साथ-सबका वि्कास"
मंत्र नही माटी के गद्दारों की!!
हम हाथ बढाये मित्रता का,
है नही ये कायर-बीमारों की!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
कमी नही है पहरेदारों की !
भून-भून के रख देगे छाती
हम मसरत के रखवारो की!!
वक्त गया छमा-याचना का,
आया तीर,तोप,तलवारों की!!
भूल गये सबक बाँग्ला देश,
और कारगिल के मारों की ?
"सबका साथ-सबका वि्कास"
मंत्र नही माटी के गद्दारों की!!
हम हाथ बढाये मित्रता का,
है नही ये कायर-बीमारों की!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

No comments:
Post a Comment