ये खूबसूरत चेहरा,क्यूँ हाथों छुपा रहे हो?
लगता है जाने-अनजाने हमे लुभा रहे हो?
कभी इन हाथों की मेंहदी धुलने ना पाये,
जो साजन है दूर,क्या उनको बुला रहे हो?
हाथों का चूडा- अभी तक खुला भी नही,
और बेवजह न जाने ,किसे रुला रहे हो ?
तुम बेशक एक नन्ही, कमसिन कली हो,
फ़ूल बनने का अहसास,क्यूँ दिला रहे हो?
हटा लो जो हाथ पल भर , इस चेहरे से,
छितिज़ पर धरती-आस्मान मिला रहे हो?
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा आगरा २८२००७
लगता है जाने-अनजाने हमे लुभा रहे हो?
कभी इन हाथों की मेंहदी धुलने ना पाये,
जो साजन है दूर,क्या उनको बुला रहे हो?
हाथों का चूडा- अभी तक खुला भी नही,
और बेवजह न जाने ,किसे रुला रहे हो ?
तुम बेशक एक नन्ही, कमसिन कली हो,
फ़ूल बनने का अहसास,क्यूँ दिला रहे हो?
हटा लो जो हाथ पल भर , इस चेहरे से,
छितिज़ पर धरती-आस्मान मिला रहे हो?
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिक्न्दरा आगरा २८२००७


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