है सत्य यही,तुम सास नही मेरी माँ हो,
मॄत्यु लोक मे ढूँढ रहा मै, आज कहाँ हो?
व्याकुल मन विछिप्त सा प्रतीत होता है,
सब के सन्मुख हँसता,पर भीतर रोता है!!
तुम उपेन्द्र ,गिरीश,हरेश की माता थी,
पर आज कहूँ, मेरी तो तुम भ्राता थी!!
बीना, मीरा,और आभा की जननी थी,
है सत्य यही ,मेरी तो तुम भग्नी थी!!
जीवन संघर्षों की तुम एक कहानी थी,
सुकेश,सौरभ,निर्मन्यु,सार्थक की नानी थी!!
करुणा,पुष्पा,अनुराधा की तुम सास सही
फ़िर जन्म इसी कुल मे लो, आस यही !!
गरिमा,सौम्या,विपुल सबकी तुम दादी थी,
क्रोध-अहंकार नही,प्रेम-सद्भाव की आदी थी!!
कैसे सुन पाऊँगा वो निश्छल अट्टहास,
क्योंकि आज नही हो ,तुम मेरे पास !!
अब नही मिलेगी मुझको कोई शबासी,
सोच-सोच यही छाई है,अब एक उदासी!!
दया, छमा, सेवा-सदभाव और परमार्थ,
ये थे आदर्श तुम्हारे, और ये ही स्वार्थ!!
माँ-पिताजी के प्रयाण पर,था नही अनाथ,
पर अब लगता,जब छोड गई तुम साथ!!
तुम कहती थी,नर सेवा ही नारायण सेवा,
उससे बडा ना ओई देवी,और नाकोई देवा!!
कोशिश यही रहेगी,तेरे आदर्श ही अपनाऊँ,
पर विश्वास नही,कैसे-कभी तुझे भुला पाऊ!!
जीवन-मरण विधि का लेखा, विश्राम करो!
संक्ल्प करो- जीवन भर सेवा निष्काम करो!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७
मॄत्यु लोक मे ढूँढ रहा मै, आज कहाँ हो?
व्याकुल मन विछिप्त सा प्रतीत होता है,
सब के सन्मुख हँसता,पर भीतर रोता है!!
तुम उपेन्द्र ,गिरीश,हरेश की माता थी,
पर आज कहूँ, मेरी तो तुम भ्राता थी!!
बीना, मीरा,और आभा की जननी थी,
है सत्य यही ,मेरी तो तुम भग्नी थी!!
जीवन संघर्षों की तुम एक कहानी थी,
सुकेश,सौरभ,निर्मन्यु,सार्थक की नानी थी!!
करुणा,पुष्पा,अनुराधा की तुम सास सही
फ़िर जन्म इसी कुल मे लो, आस यही !!
गरिमा,सौम्या,विपुल सबकी तुम दादी थी,
क्रोध-अहंकार नही,प्रेम-सद्भाव की आदी थी!!
कैसे सुन पाऊँगा वो निश्छल अट्टहास,
क्योंकि आज नही हो ,तुम मेरे पास !!
अब नही मिलेगी मुझको कोई शबासी,
सोच-सोच यही छाई है,अब एक उदासी!!
दया, छमा, सेवा-सदभाव और परमार्थ,
ये थे आदर्श तुम्हारे, और ये ही स्वार्थ!!
माँ-पिताजी के प्रयाण पर,था नही अनाथ,
पर अब लगता,जब छोड गई तुम साथ!!
तुम कहती थी,नर सेवा ही नारायण सेवा,
उससे बडा ना ओई देवी,और नाकोई देवा!!
कोशिश यही रहेगी,तेरे आदर्श ही अपनाऊँ,
पर विश्वास नही,कैसे-कभी तुझे भुला पाऊ!!
जीवन-मरण विधि का लेखा, विश्राम करो!
संक्ल्प करो- जीवन भर सेवा निष्काम करो!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७


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