Thursday, April 10, 2008

विद्या मन्दिर

विद्या मन्दिर अब बाज़ार हो गया ,प्रमाण-पत्र क्रय- विक्रय का व्योपार हो गया !
गाँव-गाँव में पढे लिखों का अम्बार हो गया, विद्या-मन्दिर अब बाज़ार हो गया !!
शिक्षक कितना ,अब लाचार हो गया ,पुत्र उसी का गुंडों का सरदार हो गया !
कक्षा में आ जाए ,तो आभार हो गया ,विद्या-मन्दिर अब बाज़ार हो गया !!
विषय बोझ से लदा शिष्य,बीमार हो गया ,नित नूतन पाठ्य-क्रम कुतुब मीनार हो गया !
शिक्षा -नीति बदलना ,मात्र एक त्यौहार हो गया ,विद्या मन्दिर अब बाज़ार हो गया !!
राजनीति से सरस्वती को प्यार हो गया ,विद्या-मन्दिर अब बाज़ार हो गया !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकन्दरा आगरा २८२००७ मो9412443093

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