Tuesday, February 26, 2008

होली

मिलने की रुत है,होली का मिलन भाई !
खुशियों का बुत है ,होली का जश्न भाई !!
मज़हब सारे हमे ,मेल औ मोहब्बत ही सिखाएं !
पंडित औ ये मुल्लाह ,ही हमे आपस में लदाएं !!मिलने की रुत .....
क्यों इनके कहने में हम ,अपनों का ही खून बहायें ?
इंसानियत ही है मज़हब ,बच्चों को येही पाठ पधायें !! मिलने की रुत...
आज जला दो इन, गिले शिक्वो की सदायें !
आपस में गले मिलके ,सारी दुनिया को सुनाएँ !! मिलने की रुत....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकन्दरा आगरा -282007

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