Thursday, April 10, 2008

मासूम

आज एक मासूम पे मेरा दिल आया है !
दिल के दरवाज़े पे उसने दस्तक दी है ,और खाव्बों में बुलाया है !!
उनका बुलाने का अंदाज़ भी या तोबा ?
ख्वाबों में किए हैं सजदे ,और ख्यालों में बुलाया है !!
देखिये यह नजाकत उनकी ,
डाले हैं जुबां पर ताले और पलकों को हिलाया है !!
कहिये यह कशिश उनकी ,
कागज़ और कलम भी नहीं ,पैगाम दिलाया है !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकन्दरा आगरा २८२००७ मोब; 9412443093

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