Sunday, February 10, 2013

वैलैन्टाइन


भूल गये अपनी संस्क्रति,
भूल गये  तीज़-त्यौहार !
गले लगा लिया वैलैन्टाइन,
भूल गये "बसंत-बहार !!
कामदेव की करो आराधना,
फ़िर करो प्रेम इज़हार !
क्यूँ "वैलैन्टाइन" मनायें?
नही अग्रेज़ी के पहरेदार!!भूल गये अपनी ......
सरसों फ़ूली है बासन्ती,
भ्रमर करते है गुन्जार !
अपनी-अपनी होती है,
दूजे की क्यों करे गुलजार!!भूल गये अपनी ...
है वही तिथि वोही माह,
फ़िर काहेका तिरस्कार !
मन मयूर जब नर्तन करे,
छोटे-बडे करो सभी को प्यार!!भूल गये अपनी.....
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा२८२००७

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