Tuesday, February 12, 2013

कुछ बातें पन्नो पर


कुछ बातें पन्नो पर ,कुछ दिल मे लिख दीं,
पन्नों पर दिखती है,दिल की नही दिख दी!!
लाऊं कहाँ से इतनी इबारत कि पैगाम लिखूं?
जितनी लिख पाया,बाकी संजो के रख दी!! कुछ बातें पन्नो पर ..
पल दो पल का साथ नही,वो बरसों का था,
लिख-लिख कर जो छूटा,दिल पर लिख दी!!कुछ बातें पन्नो पर...
कोई कहे शायर मुझको, कोई कहे दीवाना ,
यार पढे या फ़ाडे, मनमे जो आया लिख दी!!कुछ बातें पन्नो पर..

बोधिसत्व कस्तूरिया२०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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