Monday, December 24, 2012

दर्द का अह्सास

कभी ओस को मुट्ठी मे ना समेटो,
आसमाँ ज़मीं पर उतर आयेगा !
आँचल को तुम मुँह पर ना लपेटो,
नमाज़ी का इमाँ, बिखर जायेगा !!
जो अल्फ़ाज़ ना आये लबों तक,
निगाहो -निगाहों, संवर जायेगा !!
है कशिश इन आँखों मे इतनी,
दर्द का अह्सास, ठहर जायेगा !!
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