Friday, January 16, 2009

satya

हमने जिंदगी को ,इतने करीब से देखा है !

जीवन-मृत्यु मध्य ,एक हल्की रेखा है !!

पता नही इह लोक-परलोक की दूरी ,कब मिट जाय?

विश्वास-अविश्वास की मजबूरी कैसे घट जाय ? हमने जिंदगी .......

रिश्तों दुशाला ओढ ,छिपे हैं कितने ही हत्यारे ?

उन्हें क्या फर्क पड़ता है,कि कौन मरता है प्यारे?हमने जिंदगी ........

जिंदगी काल के गाल,चंद लम्हों में सिमट जाती है !

shashwat सत्य के दिए की ,जीवन इक बाती है !!हमने जिंदगी .......
बोधी सत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
प्रस्तुतकर्ता SAMVEDNA पर 8:59 AM 0 टिप्पणियाँ
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1 comment:

MAYUR said...

मैंने भी ये महसूस किया है