Tuesday, September 29, 2015

आस्था

इन भूली बिसरी यादों मे,
कुछ यादें शेष तुम्हारी हैं!
छोड गये तुम बीच भँवर,
पर ज़िन्दा अब भी यारी है!!
जब भी कभी पुकारा तुमने,
पुनःमिलन की तैय्यारी है!!
यह मिलना और बिछुडना,
जीवनक्रम फ़िर भी ज़ारी है!!
दूरियाँ और प्यार बढाती हैं,
संग-संग चलना दुशवारी है!!
प्यार करो और खूबनिभाओ,
आस्था केवल यही हमारी है!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा२८२००७


No comments: