दुनिया का सातवाँ अज़ूबा है आगरा !
हर खुशी और गम मे डूबा है आगरा !!
अग्रसेन की नियामत है अपना शहर !
हर कुफ़्र् से दूर,बरकतों का अपना शहर !!
अकबर ने बनाया इसे ,अपनी राजधानी!
सुलह-कुल की नगरी, हर धर्म का पानी !!
पेठा,जूते औ ताज की, हर मुल्क है दीवानी!
ताज का दीदार कर ,खरीदता है हर सैलानी!!
गुड,सौंठ,नमक,हींग से लेकर राजा की मण्डी!
अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार था कभी,पर अब ठण्डी!!
अमीर खुसरो और गालिब की है यह ज़मी!
यहाँ नही इसीलिये ,मुहब्बत-इख्लाक की कमी!!
पैबस्त है मुहब्ब्त , शाहजहाँ और मुम्ताज की!
फ़ैली है सारे ज़हाँ मे ,शौहरत इसकी आज भी!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७


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