
जब साँझ ढले ,कोई दीप जले ।
समझो दीपावली आयी है !!
जब कोई राग जगे ,
जब कोई आग लगे,
समझो दीपावली आयी है !!
जब कोई नार सजे ,
जब कोई तार बजे,
समझो दीपावली आयी है !!
जब शंख बजे ,
जब ढोल बजे,
समझो दीपावली आयी है!!
जब गणपति का हो पूजन,
जब लक्ष्मी का हो आवाहन ,
समझो दीपावली आयी है !!
जब बच्चों का हो क्रंदन ,
जब पटाखों का हो घर्षण,
समझो दीपावलीआयी है !!
जब खील खिलोनो का हो आवंटन,
जब पुष्प -मिष्ठानों का हो वितरण ,
समझो दीपावली आयी है !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007
समझो दीपावली आयी है !!
जब कोई राग जगे ,
जब कोई आग लगे,
समझो दीपावली आयी है !!
जब कोई नार सजे ,
जब कोई तार बजे,
समझो दीपावली आयी है !!
जब शंख बजे ,
जब ढोल बजे,
समझो दीपावली आयी है!!
जब गणपति का हो पूजन,
जब लक्ष्मी का हो आवाहन ,
समझो दीपावली आयी है !!
जब बच्चों का हो क्रंदन ,
जब पटाखों का हो घर्षण,
समझो दीपावलीआयी है !!
जब खील खिलोनो का हो आवंटन,
जब पुष्प -मिष्ठानों का हो वितरण ,
समझो दीपावली आयी है !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

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