Wednesday, July 30, 2008

सावन

सावन रिम झिम की बोछार ,सावन शिव शंभू का त्यौहार !
सावन भाई- बहन का प्यार , सावन रक्षा-बंधन का त्यौहार !!
सावन झूलों का उदगार ,सावन कोयल -पपीहे का संसार !
सावन साधक की है साधना ,सावन प्रेयसी का है श्रृंगार !!
सावन मस्ती और मल्हार, सावन नदिया की है बहती धार !
सावन फिर भी परमेश्वर की मार,जिसमे डूब गए लाखों घर-द्वार !!सावन रिमझिम .......
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा 282007

1 comment:

परमजीत सिहँ बाली said...

बहुत सुन्दर!बहुत बढिया रचना है।सच में सावन की बहार है सब ओर...\