Wednesday, December 11, 2013

फ़िर तुम्हारा होना चाहता हूँ

न मै तुम्हे खोना चाहता हूं ,
न तुमसे दूर होना चाहता हूं !
बस की है जो तुमसे बेवफ़ाई,
शर्मिन्दगी मे रोना चाहता हूं!!
इकरार तुमसे मै करता हूँ ,
दिल-ओ-जान से मरता हूँ,
फ़रिश्ता तो मै हरगिज़ नही ,
पर इन्सान होना चाहता हूँ !!
कभी कोई अपनो से रूठता है,
इससे अपनो का दिल टूट्ता है,
दिल मे तुम्हारे रहता था मै ,
फ़िर तुम्हारा होना चाहता हूँ!!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

No comments: