Friday, April 5, 2013

दर्द के सैलाब


दर्द के सैलाब को कैसे रोक दूं,?
सर्द के प्रेमालाप कैसे रोक दूं ?
मै महज़ एक आम इन्सान हूँ -
देव के अभिशाप कैसे रोक दूं?
दर्द के सैलाब को कैसे रोक लूं,?
तुम चाहो अभिसार कम करो,
पर निज पाप को कैसे रोक दूं ?
दर्द के सैलाब को कैसे रोक लूं,?
प्यार वासना का ही प्रारब्ध है
वासना के श्राप को कैसे रोक दूं?
दर्द के सैलाब को कैसे रोक दूं ?
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

1 comment:

Jyoti khare said...

मै महज़ एक आम इन्सान हूँ -
देव के अभिशाप कैसे रोक दूं?------
जीवन का सच/गहन अनुभूतियों को सहजता से
व्यक्त किया है आपने अपनी रचनाओं में
बधाई और शुभकामनायें

आग्रह है मेरे ब्लॉग jyoti-khare.blogspotin
में भी सम्मलित हों ख़ुशी होगी