कैसे खेलूं फ़ाग सखी री, कैसे खेलूं फ़ाग ?
मेवा-मावा सब मे लग रही कैसी आग!!!
कैसे खेलूं फ़ाग सखी री..कैसे खेलूं फ़ाग ?
पानी नाही जमनाजी मे,फ़ेंक रही है झाग,!!
कैसे खेलूं फ़ाग सखी री..कैसे खेलूं फ़ाग ?.
नाते-रिश्ते भुलाय गये,ऐसी लग रही आग!!
कैसे खेलूं फ़ाग सखी री.कैसे खेलूं फ़ाग ?.
होय गई अटरिया इत्ती ऊँची,बोले नाही काग!!
कैसे खेलूं फ़ाग सखी री, कैसे खेलूं फ़ाग ?
नफ़रत इती बढ गई,नाय रह्यो प्रेम को राग!!.
कैसे खेलूं फ़ाग सखी री, कैसे खेलूं फ़ाग ?
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुन्ज सिकन्दरा आगरा २८२००७

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