Tuesday, February 10, 2009

मैं और तुम


मैं वेणी बन सकता हूँ ,यदि तुम अपने केश सजाओ !
मैं कर्ण फूल बन सकता हूँ,जो तुम अपने गाल सजाओ !!
मैं इंगुर बन सकता हूँ , जो तुम अपनी मांग रचाओ !
मैं बेंदी बन जाऊं, जो तुम अपने भाल सजाओ !!मैं वेणी बन सकता हूँ ......
मैं काजल सा काला बन जाऊं,जो तुम अपने नैन बसाओ!
मैं हार गले का बन जाऊं,जो तुम अपने सीने मुझे लगाओ !!मैं वेणी बन सकता हूँ......
प्रीतम मैं तेरा कहलाऊँ ,जो तुम अपने हृदय बसाओ !!
मैं वेणी बन सकता हूँ, जो तुम अपने केश सजाओ !!
बोधिसत्व कस्तूरिया २०२ नीरव निकुंज सिकंदरा आगरा २८२००७

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